विधवा प्रेमिका-डॉ मुश्ताक़ अहमद
Dr. Mushtaque Ahmad25 सितंबर 20261 मिनट पढ़ने में
हाँ,
कभी-कभी प्रेमिकाएँ भी विधवा होती हैं
बिना विवाह के,बिना चूड़ियाँ टूटे,
बिना माँग धोए,
बिना किसी संस्कार के।
बस वो शख़्स नहीं मरता है
जिससे वे प्रेम करती थीं
बस मर जाता है
उसके लौट आने का विश्वास।
फिर उम्र भर वे किसी तस्वीर पर नहीं,
एक अधूरी स्मृति पर
सफ़ेद चुप्पी ओढ़े रहती हैं।
- डॉ.मुश्ताक़ अहमद ‘अक्स’
Poem
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